Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 150
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 151
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
न्यूज क्लिपिंग्स् | बर्बरता पर रोक लगाना जरूरी-- पवन के वर्मा

बर्बरता पर रोक लगाना जरूरी-- पवन के वर्मा

Share this article Share this article
published Published on Jun 19, 2018   modified Modified on Jun 19, 2018
कभी-कभी मैं महसूस करता हूं कि गणतंत्र में जो कुछ बिल्कुल ही अस्वीकार्य है, वह अब सामान्य-सा होता जा रहा है. जब पहली बार पशु व्यवसायियों पर हमले हुए, तो वे समाचार बने, मगर यह इतनी दफा होने लगा कि शुरुआती सदमा समाप्त हो चला है. इन वारदातों की खबरें और टिप्पणियां अब चलताऊ किस्म की होती हैं. यदि हम यह यकीन करते हैं कि भारत विश्व का सबसे बड़ा गणतंत्र होने के अलावा सबसे पुरानी और प्रसंस्कृत सभ्यताओं में एक है, तो हमारी असंवेदनशीलता का यह स्तर इन दोनों ही कसौटियों पर हमें कठघरे में ला खड़ा करता है.


पिछले सप्ताह झारखंड के गोड्डा जिले में कथित पशु चोरी के आरोप में दो व्यक्तियों को पीट-पीट कर मार डाला गया, जो दोनों मुस्लिम थे. उनमें से एक के पिता ने बताया कि उसका बेटा वास्तविक पशु व्यवसायी था. झारखंड में इसके पहले मार्च, 2016 तथा जून, 2017 में ऐसी ही घटनाओं में कई पशु व्यवसायी गौरक्षक हिंसा के शिकार बने. सितंबर, 2015 में अखलाक को गोमांस खाने के संदेह में भीड़ द्वारा मार डाला गया था. उसके पुत्र पर भी हमला कर उसे अधमरा कर दिया गया. अप्रैल, 2017 में राजस्थान में एक पशुपालक पहलू खान पर गौरक्षकों की भीड़ ने तब हमला कर दिया, जब वह पशुओं को बिक्री के लिए ले जा रहा था.


इस तरह की घटनाएं केवल मुस्लिमों के ही साथ नहीं हुई हैं. देश गुजरात के ऊना में घटित जून, 2016 की उस घटना को नहीं भूल सकता, जिसमें चार दलितों को नंगा कर एक कार से बांध गोमांस विक्रेता होने के संदेह में कोड़े और सरियों से उनकी अमानवीय पिटाई की गयी. सच्चाई यह है कि जब कोई गाय मरती है, तो इस समुदाय के लोगों से ही यह अपेक्षा की जाती है कि वे उनके मृत शरीर का निस्तारण करें. पर उनका यही काम उनके साथ इस क्रूर व्यवहार की वजह बन गया.ऊना वारदात के बाद उभरे विरोध के स्वरों के बाद अगस्त, 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने अंततः अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि गौरक्षावाद ने उन्हें क्रुद्ध कर दिया है. उन्होंने इस तरह की घटनाओं की निंदा भी की, जो एक स्वागत योग्य कदम था. लेकिन, इसके बाद की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या धुर दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी प्रधानमंत्री की बातें मानते भी हैं?


आंकड़े यह बताते हैं कि 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद पशुव्यापार से संबद्ध लोगों पर हमलों में 97 प्रतिशत की वृद्धि हो गयी. यह महज एक संयोग नहीं हो सकता. अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि इन हमलों के शिकार बननेवालों में 86 प्रतिशत मुस्लिम रहे हैं. मगर ऊना की घटना ने यह बताया कि इनके पीड़ितों में दलित भी शामिल हैं. इससे भी अधिक दुखद यह है कि ऐसे 52 प्रतिशत हमले केवल संदेह की बिना पर किये जाते हैं. इन हमलावरों को यह यकीन होता लगता है कि उन्हें अधिकारियों का मौन समर्थन हासिल है और वे कानून अपने हाथों में लेकर भी उससे बचे रह सकते हैं. प्रश्न यह है कि हमारे सभ्यतागत मूल्यों व स्वयं हिंदुत्व की महान विरासत पर लगे इस बदनुमा दाग को धोने के लिए क्या किया जा सकता है. अप्रैल, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने छह राज्यों- राजस्थान, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश व कर्नाटक से यह पूछा कि वे ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने का क्या प्रस्ताव करते हैं.


सितंबर, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया कि प्रत्येक राज्य अपने प्रत्येक जिले में गौरक्षावाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने को एक नोडल पुलिस अफसर की नियुक्ति करे. इस आलोक में यह जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए कि कितने राज्यों ने इस निर्देश पर कार्रवाई की. यदि नहीं की, तो क्यों नहीं और यदि की, तो उसके क्या असर हुए? कोर्ट के इस निर्देश की भावना के ही अनुरूप यह भी बताया जाना चाहिए कि कितने दोषी पकड़े गये, कितने पर कानूनी कार्रवाई की गयी और उन्हें सजा मिली.


यह जानना भी समीचीन होगा कि अभी कितने संगठित गौरक्षक समूहों का अस्तित्व है? क्या केंद्रीय सरकार ने इनकी पहचान करने की कोई कोशिश की है? क्या राज्य सरकारों ने भी इस दिशा में कुछ किया है? कुछ अनुमानों के मुताबिक अकेले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ऐसे लगभग 200 समूह हैं. ऐसे बहुत सारे समूहों के कई सदस्य जिस सीनाजोरी से अपने इरादे व्यक्त करते रहते हैं, पुलिस के लिए इन समूहों के नेताओं की पहचान करना, उन्हें कानून के दायरे में लाना और इस तरह की अगली घटना होने के पहले ही उनके विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई कर पाना बहुत कठिन नहीं होना चाहिए.


सारांश यह कि वांछित सियासी इच्छाशक्ति का अभाव है. इनमें से बहुत सारे गौरक्षक यह यकीन करते हैं कि उन्हें कहीं-न-कहीं उनके सियासी संरक्षणदाताओं की सहमति हासिल है. इससे भी खतरनाक कई का यह विश्वास है कि वे इस बर्बर ढंग से बर्ताव कर हिंदुत्व की रक्षा कर रहे हैं. सच तो यह है कि हिंदुत्व की भव्यता पर ऐसे मूर्खतापूर्ण दावों से अधिक बड़ी चोट नहीं पहुंचायी जा सकती. बहुत से राज्यों में गौहत्या के विरुद्ध वैध कानून लागू हैं, जिनका आदर किया ही जाना चाहिए. पर किसी भी देश में ऐसे लोगों के लिए नियमों की एक ऐसी अलग श्रेणी नहीं हो सकती, जो यह यकीन करते हैं कि वे अपने-आप में ही एक कानून हैं.


https://www.prabhatkhabar.com/news/columns/arrogance-republic-animal-business-murder-pm-modi/1171936.html


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close