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राजस्थान की अवांछित बेटियां: लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या

इंडियास्पेंड, 19 मई “यहाँ दूसरे या तीसरे बच्चे के रूप में जन्म लेने वाली लड़कियों के लिए बोझा, आनाछी, कचरी, निराशा कुछ लोकप्रिय नाम हैं,” पश्चिमी राज्य राजस्‍थान की राजधानी जयपुर के ग्रामीण इलाके में रहने वाली काचरी बाई कहती हैं। बोझा का अर्थ है बोझ, अनाच्छी का अर्थ है अवांछित या खराब, कचरी का अर्थ है कचरा और निराशा का अर्थ है निराशा। अपनी बहनों रोशनी और रेणु के बाद कचरी...

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एनएसएसओ का सर्वे: केवल 49.8 % परिवार ही खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का प्रयोग कर पा रहे हैं

ग्रामीण भारत के केवल 49.8 प्रतिशत परिवार ही खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का प्रयोग कर पा रहे हैं। 46.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवार खाना पकाने के लिए लकड़ी का उपयोग कर रहे हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों के 6.5% परिवारों में खाना पकाने के लिए लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। अगर बात करें पीने के पानी की तो केवल 39.1 प्रतिशत परिवारों के पास ही आवास के भीतर पीने के पानी की...

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शहरों और गांवों में समान कार्य के लिए महिलाओं की मज़दूरी पुरुषों की तुलना में कम: रिपोर्ट

द वायर, 21 मार्च  ग्रामीण और शहरी भारत में समान कार्य के लिए बाजार द्वारा निर्धारित मजदूरी पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए काफी कम है. इससे भी बुरी बात यह है कि पिछले एक दशक में ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर बढ़ा है, हालांकि यह शहरों में कम हुआ है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय सांख्यिकी सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा जारी एक सर्वेक्षण के नतीजों के हवाले से यह जानकारी दी...

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कैसे असम का मिसिंग समुदाय वास्तुशिल्प डिजाइन के जरिए बाढ़ से मुकाबला कर रहा है

मोंगाबे हिंदी, 4 मार्च ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे मेधिपामुआ गांव में दिसंबर की गुनगुनी धूप हर तरफ फैली है। गांव के कुछ पुरुष, महिलाएं और बच्चे झुंड बनाकर जमीन से कुछ फीट ऊपर बने एक टिन की छत, खुले और कंक्रीट के ढांचे के नीचे बाढ़ से निपटने की तैयारी के तरीकों पर चर्चा करने के लिए इक्टठा हुए हैं। असम के धेमाजी जिले में पड़ने वाले इस गांव के...

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सुरक्षा की आड़ में महिला छात्राओं पर प्रतिबंध लगाना ‘पितृसत्ता’ है: केरल हाईकोर्ट

द वायर, 01 दिसंबर केरल हाईकोर्ट ने कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के महिला छात्रावास में कर्फ्यू पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि सुरक्षा की आड़ में इस तरह के प्रतिबंध और कुछ नहीं बल्कि पितृसत्ता है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अदालत ने कहा कि पितृसत्ता के सभी रूपों, यहां तक कि वे भी जो लिंग के आधार पर सुरक्षा प्रदान करने के लिए हैं, से असहमति व्यक्त की जानी चाहिए. अदालत...

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