-आइडियाज फॉर इंडिया, परिवार में कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने की स्थिति में परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (एनएफबीएस) कम बजट आवंटन, प्रतिबंधित कवरेज और प्रशासनिक बाधाओं से घिरी हुई है। इस लेख में, जैस्मीन नौर हाफिज इस योजना के कार्यान्वयन में आने वाली इन कठिनाइयों और अन्य मुद्दों की जांच करती हैं, और भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे के इस महत्वपूर्ण घटक को सुधारने...
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भारत की प्रशासनिक सेवाओं में महिलाएं इतनी कम क्यों?
-इंडियास्पेंड, साल 1951 में पहली बार जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में महिलाओं को शामिल करने का फैसला लिया गया तो एक महिला थी, लगभग सात दशक बाद 2020 में महिलाओं की संख्या कुल आईएएस अधिकारियों का सिर्फ 13% है। अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी सेंटर फॉर पॉलिटिकल डेटा (टीसीपीडी) द्वारा संकलित भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी डेटासेट (Indian Administrative Service Officers Dataset) को लेकर किए गए विश्लेषण में इंडियास्पेंड ने पाया कि 1951...
More »बनारस के मुसहर गांवों में चिंता का सबब बन रहा है कुपोषण का दोहरा बोझ
-जनपथ, आर्थिक मशीनरी की विफलता के कारण बच्चों के अस्तित्व, स्वास्थ्य और पोषण पर कोविड-19 का प्रभाव व्यापक रहा है। वाराणसी जिले के बड़ागांव प्रशासनिक ब्लॉक के अन्नाई और पड़ोसी गांवों में पाया गया कि वहां के निवासी दलितों के बीच सबसे ज्यादा हाशिये वाले मुसहर समुदाय के बच्चे आम तौर से कुरकुरे, चिप्स और क्रीम बिस्कुट सहित सस्ते पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खाते हैं, जिनमें नमक और चीनी का स्तर अधिक...
More »शहरीकरण, लैंगिक और सामाजिक परिवर्तन: क्या कामकाजी महिलाएं अधिक स्वायत्तता अनुभव करती हैं?
भारत में महिलाओं की कार्य में सीमित भागीदारी न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका असर उनके कल्याण और सामाजिक स्थिति पर भी होता है। यह लेख, उत्तर भारत के चार शहरी समूहों में किये गए एक घरेलू सर्वेक्षण के आधार पर, महिलाओं की कामकाजी स्थिति और पारिवारिक निर्णय के बारे में उनके स्वायत्तता के बीच एक मजबूत संबंध पाता है, जो भारत में महिलाओं और कामकाज के बीच...
More »उन्होंने कहा महिलाओं के बस की नहीं खेती; संगीता ने 30 लाख/वर्ष कमाकर किया गलत साबित
-द बेटर इंडिया, “मुझसे कहा जाता था कि एक अकेली महिला खेत नहीं संभाल सकती है, इसलिए मैं कभी सफल नहीं हो पाऊंगी। लेकिन मैं ऐसी बातें कहने वालों को गलत साबित करना चाहती थी।” यह कहना है नासिक के मटोरी गांव में अंगूर की खेती (Grapes farming) करने वाली महिला किसान संगीता पिंगले का। जिंदगी ने कदम-कदम पर संगीता का कड़ा इम्तिहान लिया है। पहले उन्होंने अपने बच्चे को खोया और...
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