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जेंडर

खास बात   साल 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल श्रमशक्ति की तादाद 40 करोड़ है जिसमें 68.37 फीसद पुरुष और 31.63 फीसद महिला कामगार हैं। @ तकरीबन 75.38%  फीसद महिला श्रमशक्ति खेती में लगी है। @ एफएओ के आकलन के मुताबिक विश्वस्तर पर होने वाले कुल खाद्यान्न उत्पादन का 50 फीसद महिलायें उपजाती हैं। # साल 1991 की जनगणना के अनुसार 1981 से 1991 तक पुरुष खेतिहरों की संख्या में 11.67 फीसदी की बढोतरी...

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उत्तराखंड: हाथियों के गोबर में मिला प्लास्टिक, कांच व इंसान के इस्तेमाल की अन्य चीजें

न्यूज़लॉन्ड्री, 12 जुलाई पिछले कुछ वर्षों में, हिम तेंदुओं, बाघों, तेंदुओं और हिरणों सहित वन्यजीवों की खतरनाक तस्वीरें और रिपोर्टें आई हैं, जो कचरे के ढेर में अपना भोजन तलाश रहे थे या प्लास्टिक कचरा ले जा रहे थे द जर्नल फॉर नेचर कंजर्वेशन में पिछले महीने छपे एक अध्ययन में उत्तराखंड के जंगलों में हाथी के लीद में प्लास्टिक और अन्य मानव निर्मित सामग्री के मौजूद होने का पता चला है....

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क्यों महत्वपूर्ण है भारत-अमीरात आर्थिक समझौता, इससे कैसे बढ़ेगा निर्यात

-रूरल वॉइस, संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत का व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) हाल ही पूरा हुआ है। इसे इस लिहाज से उल्लेखनीय माना जाना चाहिए कि इसमें कई बातें पहली बार हुई हैं। 2019 के क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) के बाद पहली बार भारत सरकार ने आर्थिक सहयोग समझौते (ईसीए) में तेजी दिखाई है। भारत और अमीरात के बीच सीईपीए पहला ईसीए है जिसपर एक दशक से भी ज्यादा समय...

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यूपी चुनाव 2022: प्रदेश में लाखों कुपोषित बच्चे, फिर भी 66% पोषण निधि नहीं हुई खर्च

-गांव कनेक्शन,  सर्द सुबह में, नन्ही रुसुदा प्लास्टिक की चादरों, सीमेंट की बोरियों और गूदड़ों से बनी अपनी झोंपड़ी में इस उम्मीद में भागी कि उसकी मां के पास खाने के लिए कुछ होगा। अंदर उसकी मां सन्नो के पास अपनी ढाई साल की बेटी को खिलाने के लिए कुछ नहीं था। वह बर्तनों से चिपका खाना खुरच कर निकालने लगी। खाने के लिए पिछली रात की थोड़ी सी बची हुई...

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स्वास्थ्य बीमा से महरुम हैं कचरा बीनने वाले, 33 प्रतिशत के पास जनधन खाते नहीं

-डाउन टू अर्थ, देश के बड़े शहरों में कचरा बीनने वालों के पास पांच फीसदी से भी कम स्वास्थ्य बीमा है, जबकि 79 प्रतिशत सफाई साथियों के जनधन खाते नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से 25 जनवरी 2022 को कचरा बीनने वालों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का बेसलाइन विश्लेषण जारी किया गया। यूएनडीपी की प्लास्टिक मैनेजमेंट यूनिट और पॉलिसी यूनिट ने यह रिपोर्ट तैयार की है। कचरा बीनने वालों...

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