-गांव कनेक्शन, मौसम की मार के बाद देश के किसानों को अब सही कीमतों के लिए जूझना पड़ रहा है। गेहूं, सरसों, कपास और दलहनी फसलों की कीमत मंडियों में सरकार की तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से बहुत कम मिल रही है। ऐसे में भारी बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान झेल रहे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। आंध्र प्रदेश, अनंतपुर के गांव पुतलुर के किसान मुरली धर 20 मार्च...
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खरपतवार के साथ प्राकृतिक खेती -बाबा मायाराम
मध्यप्रदेश के होशंगाबाद शहर से कुछ ही दूरी पर है टाइटस फार्म। होशंगाबाद भोपाल सड़क मार्ग पर नर्मदा नदी के तट पर स्थित इस इलाके में प्राकृतिक खेती होती है जोकि जमीन की जुताई किए बगैर की जाती है। इस इलाके में फसल के अवशेषों को जलाने के बजाय उससे भूमि ढकाव करते हैं, जिससे खेत में नमी रहती है और जल संचय होता है। उसमें पनपने वाले केंचुए और...
More »45 हजार किसानों का ही धान खरीद पाई बिहार सरकार
-डाउन टू अर्थ धान की सरकारी खरीद का मौसम आधे से अधिक बीत चुका है, मगर अभी तक बिहार के सिर्फ 45 हजार किसान अपनी धान की फसल को सरकार को बेचने में सफल हो पाये हैं। सिर्फ इन्हें ही सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य 1835 रुपये का लाभ मिल सका है। शेष बचे ज्यादातर किसानों को अपनी खरीफ की पैदावार को बहुत कम कीमत में स्थानीय कारोबारियों को बेचने को...
More »अदल-बदल कर लगाएं फसल तो कीड़े नहीं कर पाएंगे नुकसान
दुनियाभर में फसलों पर तेजी से कीड़ों का हमला बढ़ता जा रहा है। अभी हाल ही में राजस्थान और गुजरात में टिड्डी दल के हमले ने भारी मात्रा में फसलों को नुकसान पहुंचाया था। वहीं, अफ्रीका के कई देशों में आर्मीवॉर्म ने खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल दिया था। पर वैज्ञानिकों ने उससे निपटने का एक रास्ता ढूंढ लिया है। उन्होंने एक नए शोध में कम्प्यूटेशनल मॉडल प्रस्तुत किया...
More »यहां सिर्फ छह हजार में बिकते हैं पहाड़, मुफ्त में बटोर सकते हैं करोड़ों साल पुराने फॉसिल्स
करमपुरातो हटिया में हमारी मुलाकात पहले जुगल पहाड़िया और फिर जिन परो से हुई. जुगल पहाड़िया ने तो साफ इनकार कर दिया कि वे पहाड़ बेचते हैं. उनका कहना था कि पहाड़ बेचने से पहाड़ खराब हो जाता है. इसलिए हम उसे नहीं बेचते, घर चलाने के लिए जंगल से लकड़ी बिन कर लाते हैं. मगर जिन परो ने कहा उनके पास 250 एकड़ का पहाड़ है, वे छह हजार...
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