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पीएम-किसान सम्मान निधि योजना: आखिर किन किसान परिवारों को सहायता मिलेगी ?

‘पैसा ना कौड़ी, बीच बाजार में दौड़ा-दौड़ी’- क्या आपने कभी ये कहावत सुनी है? इस कहावत का ठीक-ठीक अर्थ समझना हो तो इस बार के अंतरिम बजट की एक खास घोषणा को गौर से पढ़िये! घोषणा हुई है कि दो हैक्टेयर तक की जोत वाले किसानों को सालाना आमदनी-सहायता के रुप में छह हजारे मिलेंगे, रुपया सीधा किसानों के बैंक-खाते में जायेगा. लेकिन क्या आपने अंतरिम वित्तमंत्री के अंतरिम बजट के हिसाब किताब पर...

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मध्य प्रदेश में कर्ज़माफी प्रक्रिया के दौरान आईं 25 हज़ार शिकायतें

भोपाल: मध्य प्रदेश में ‘जय किसान फसल ऋण माफी' योजना के तहत चल रही आवेदन (फॉर्म) भराने की प्रकिया के दौरान चौंकाने वाली शिकायतें सामने आ रही हैं. अब तक 25 हजार से ज़्यादा शिकायतें आ चुकी हैं. इन शिकायतों के निपटारे के लिए नियंत्रण कक्ष बनाए जाने की तैयारी चल रही है. सूत्रों के अनुसार, कर्ज़माफी के फॉर्म भराने की प्रक्रिया 15 जनवरी से चल रही है. इसके लिए...

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कृषि क़र्ज़ माफ़ी उतनी ग़लत नीति नहीं है जितनी कि लोग सोचते हैं: अमर्त्य सेन

नई दिल्ली: प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा कि कृषि कर्ज मांफी उतनी गलत या मूर्खतापूर्ण नीति नहीं है जितनी की लोग सोचते हैं. मिंट को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि कर्ज माफी पूरी तरह से गलत नीति है. उन्होंने कहा, ‘कृषि संकट कई समस्याओं में से एक है. 1920 के दशक से ही हम इस पर चर्चा...

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कमार आदिवासियों की देसी खेती-- बाबा मायाराम

छत्तीसगढ़ के राजिम-नवापारा में मुझे कुछ समय पहले जाने का मौका मिला। वहां सामाजिक कार्यकर्ता रामगुलाम सिन्हा रहते हैं। उन्होंने मुझे उनकी प्रेरक संस्था के काम को देखने के लिए बुलाया था। वे गरियाबंद के कमार आदिवासियों के बीच में लम्बे समय से काम कर रहे हैं।   कमार, आदिम जनजातियों में एक हैं। जो अब भी उनकी पारंपरिक जीवनशैली के करीब हैं और निर्धन हैं। यह आदिवासी गरियाबंद, छुरा और...

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मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत?

खेती-किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने गुजरे चार सालों में क्या कुछ किया है, उसपर आप महज एक घंटे में राय बनाना चाहते हैं तो फिर यह पुस्तक आप ही के लिए है.(पुस्तक आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं)   किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार के हासिल-लाहासिल को परखने के तीन रास्ते हो सकते हैं. एक तो सरकार के वादों को परखना कि वे किस हद तक पूरे हैं. दूसरे, सरकार के दावों...

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