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चर्चा में.... | मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत?
मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत?

मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत?

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published Published on Dec 5, 2018   modified Modified on Dec 7, 2018

खेती-किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार ने गुजरे चार सालों में क्या कुछ किया है, उसपर आप महज एक घंटे में राय बनाना चाहते हैं तो फिर यह पुस्तक आप ही के लिए है.(पुस्तक आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

 

किसानी के मोर्चे पर केंद्र सरकार के हासिल-लाहासिल को परखने के तीन रास्ते हो सकते हैं. एक तो सरकार के वादों को परखना कि वे किस हद तक पूरे हैं. दूसरे, सरकार के दावों को तौलना कि उनमें कितना दिखावा और कितनी सच्चाई है और तीसरे, यह देखना कि जीविका के लिए खेती-बाड़ी पर निर्भर आबादी के साथ किसी प्राकृतिक आपदा(मिसाल के लिए सूखा या बाढ़) के वक्त सरकार ने क्या सलूक किया.

 

किसानी के मोर्चे पर सरकार के कामकाज और सोच को परखने के लिए किताब में इन तीन कसौटियों का इस्तेमाल किया गया है और किताब के लेखक तथ्यसंगत-तर्कसंगत विश्लेषण के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं के केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार आजादी के बाद देश की सबसे किसान विरोधी सरकार है.

 

लेखक के मुताबिक, देश में आज तक किसान हितैषी सरकार का राज तो कभी नहीं आया, लेकिन मोदी सरकार का किसान विरोध पिछली सब सरकारों को मात करता है. यह देश की पहली सरकार है जो मानसिक, व्यावहारिक और भावनात्मक तीनों स्तर पर किसान विरोधी साबित हुई है. लेखक ने भरपूर तथ्यों के सहारे स्थापना दी है कि केंद्र की मौजूदा सरकार अपने सोच में किसान विरोधी है, इस की नीतियां किसान विरोधी हैं और इसकी नीयत किसान विरोधी है.

 

प्रमाणिक तथ्यों और आंकड़ों के साथ यह पुस्तक मोदी सरकार के किसान संबंधी चुनावी वादों, सरकारी दावों और डबल आय के नारे का सच उजागर करती है. पाठकों की सुविधा के लिए पुस्तक के कुछ तथ्य नीचे लिखे जा रहे हैं:

 

• लागत का डेढ़ गुना दाम देने के चुनावी दावे से सरकार पहले तो मुकरी, फिर लागत की परिभाषा बदल कर किसानों के साथ धोखा किया।

 

• दावा न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि का था, लेकिन वास्तव में यह 2008 की वृद्धि से भी कम था।

 

• जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया वह भी किसान को कभी नहीं मिला। "पीएम आशा" योजना फ्लॉप हो गई है।

 

• कृषि में दोगुना खर्च करने का दावा सफेद झूठ है। पिछली सरकार की तरह मोदी सरकार ने भी बजट का सिर्फ 2% कृषि पर खर्च किया

 

• फसल बीमा योजना से सरकारी खर्च 450% बढ़ा लेकिन लाभान्वित होने वाले किसान 10% भी नहीं बढ़े। योजना लागू होने पर किसानों को बीमा का क्लेम 21,608 करोड़ से घटकर 15,502 करोड हो गया।

 

• किसानों की आय डबल करने का नारा महज एक जुमला है क्योंकि इसके लिए अब तक ना तो कोई योजना है ना बजट ना ही प्रगति की कोई समीक्षा पिछले चार साल में किसान की आय सिर्फ 2.2% की सालाना दर से बढ़ी है, जबकि डबल करने के लिए 10.4% की जरूरत थी।

 

किसान का भला करना तो दूर की बात है इस सरकार ने किसानों की आपदा में भी उनकी मदद नहीं की, बल्कि अपनी नीतियों से किसानों को नुकसान पहुंचाया।

 

• लगातार दो साल राष्ट्रव्यापी सूखे में मोदी सरकार ने बेरुखी दिखाई, राहत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अवहेलना की।

 

• बाजार भाव गिरने पर सरकार ने किसान की मदद करने की बजाय विदेश से आयात कर से उसे नुकसान पहुंचाया

 

• सूखे और मंदी से उभरते किसान पर नोट बंदी का तुगलकी फैसला कर सरकार ने किसान की कमर ही तोड़ दी।

 

• कृषि निर्यात पहले से कम हो गया, निर्यात आयात का सरप्लस 159 हजार करोड़ रु से घटकर 82 हजार करोड़ रु हो गया।

 

• पिछले साल भर में डीजल, खाद, कीटनाशक और बीज के दाम में 20% से 30% तक बढ़ोतरी हुई है।

 

• गौ हत्या रोकने के नाम पर देशभर में पशु व्यापार ठप पड़ गया है, पशुओं के दाम गिर रहे हैं और किसान आवारा पशुओं की समस्या से त्रस्त है।

 

• मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून को खत्म करने की बार-बार कोशिश की और वनाधिकार कानून मैं आदिवासी किसानों के अधिकारों को भी कमजोर किया।

 

अगर आप किसान-आंदोलन से जुड़े हैं, खेती-किसानी की समस्याओं पर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता या फिर स्वतंत्र पत्रकार हैं तो पुस्तक की प्रति निशुल्क प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित पते पर संपर्क करें- contact@swarajindia.org

 

पुस्तक का नाम: मोदी राज में किसान: डबल आमद या डबल आफत
लेखक: योगेन्द्र यादव
स्वराज अभियान प्रकाशन
पुस्तक के वितरक- वाणी प्रकाशन,
21-ए, दरियागंज, नई दिल्ली-110002



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