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लीची शहद के लिए मशहूर बिहार उत्पादन में आगे, पर दूसरे राज्यों पर निर्भर किसान

मोंगाबे हिंदी, 19 अप्रैल,  बिहार के गया जिले में परैया मरांची गांव के चितरंजन कुमार 18-20 टन शहद का उत्पादन करते हैं। ठीक ऐसे ही, इस ही गाँव के निरंजन प्रसाद भी साल में करीब 20 क्विंटल शहद का उत्पादन करते हैं। लेकिन, इतने उत्पादन के बावजूद भी उन्हें शहद उत्पादन में बहुत ज्यादा फायदा नहीं होता है। चितरंजन और निरंजन दोनों ही इसके लिए प्रदेश में शहद के प्रोसेसिंग प्लांट...

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राप्ती नदी में हर रोज गिर रहा 500 टन नगरीय कचरा, प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण अधूरा

डाउन टू अर्थ, 30 मई उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में नगर निगम द्वारा राप्ती नदी की धारा में हर रोज 500 टन नगरीय कचरा गिराया जा रहा है। वहीं, अभी तक निस्तारण के लिए कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट का काम भी पूरा नहीं किया जा सका है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने एनजीटी में अपनी रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा है कि सुथनी गांव में 500 टन प्रति दिन का...

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लैंडफिल साइट का कचरा: एनजीटी ने दिल्ली सरकार पर लगाया 900 करोड़ रुपए का जुर्माना

डाउन टू अर्थ, 13 अक्टूबर ठोस नगरीय कचरे का तय वैज्ञानिक मानकों के आधार पर नियमित उपचार न करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का सख्त रवैया कायम है। एनजीटी ने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के बाद अब दिल्ली सरकार पर लीगेसी वेस्ट का निपटारा न करने के लिए 900 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जुर्माने की यह राशि 300 रुपए...

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जानिए क्यों एनजीटी ने महाराष्ट्र पर लगाया 12,000 करोड़ का जुर्माना

डाउन टू अर्थ, 12 सितम्बर   नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महाराष्ट्र पर 12,000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। गौरतलब है कि एनजीटी ने यह जुर्माना तरल अपशिष्ट, सीवेज और लम्बे समय से जमा कचरे का ठीक से निपटान न करने के लिए लगाया है। कोर्ट के आदेशानुसार इस राशि को अगले दो महीनों के भीतर जमा करना है, जिसे पर्यावरण की बहाली के लिए खर्च किया जाएगा। कोर्ट के अनुसार राज्य...

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रागी, कोदो जैसे मोटे अनाज की खेती को बचाने की पहल, जिससे किसानों को मिले उनकी उपज का सही दाम

गाँव कनेक्शन, 7 सितम्बर  रागी, बाजरा जैसे मोटे अनाज की खेती के बाद प्रोसेसिंग के पुराने और परंपरागत तरीकों से न ही सही से अनाज निकल पाता है और न ही बाजार में उसका सही दाम मिल पाता है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र, उन किसानों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए मददगार साबित हुआ है जो मोटे अनाज की खेती करते हैं। भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान के निदेशक...

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