दिप्रिंट,7 जुलाई यूपी विधान परिषद में पार्टी के एकमात्र एमएलसी दीपक सिंह बुधवार को सेवानिवृत्त हो गए, जिसके बाद कांग्रेस का यूपी विधान परिषद में कोई भी प्रतिनिधि नहीं रहेगा. नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कांग्रेस के एकमात्र एमएलसी दीपक सिंह बुधवार को सेवानिवृत्त हो गए, जिसके बाद पार्टी का पहली बार यूपी विधान परिषद में कोई भी प्रतिनिधि नहीं रहेगा. यह इस साल की शुरुआत में यूपी विधानसभा चुनाव में...
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संभल रही भारतीय अर्थव्यवस्था पर ओमीक्रॉन का खतरा, सुधार करने की जरूरत, बजट तक नहीं कर सकते इंतजार
-द प्रिंट, ऐसे समय में जब हम सब भारतीय कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के भयावह अनुभव से गुजरने के बाद थोड़ी सी राहत की सांस ले रहे थे, इसका एक नया संस्करण, ओमीक्रॉन, हर किसी से उसकी उम्मीदों और आशावादिता के ‘हरियाली’ (ग्रीन शूट्स) को छीन लेने के लिए आ धमका है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को बुखार और गले में खराश के मामलों को ओमीक्रॉन के लक्षणों...
More »जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी के लिए 163 नहीं, 10,000 पेड़ काटे गए: याचिका
-द वायर, उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें ये आरोप लगाया गया है कि सफारी के लिए 163 पेड़ नहीं, बल्कि 10,000 पेड़ काटे गए हैं. साल 2019 में नरेंद्र मोदी की मौजूदगी वाले डिस्कवरी चैनल के मशहूर शो ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ की शूटिंग के दौरान इस तरह के सफारी प्रोजेक्ट की परिकल्पना की...
More »बिहार में 'विकास की जाति' पर बात करने से क्यों डरते हैं हिंदीपट्टी के राजनीतिक टिप्पणीकार!
-न्यूजलॉन्ड्री, पिछले तीस वर्षों की भारतीय राजनीति, खासकर उत्तर भारतीय राजनीति पर जब टिप्पणीकार टिप्पणी करते हैं तो सामान्यता इस बात का जिक्र करना नहीं भूलते कि किस तरह विभिन्न जाति के नेताओं ने सिर्फ अपनी जाति का विकास किया. वही टिप्पणीकार हालांकि जान-बूझकर इस बात को भूल जाते हैं कि बिहार में विकास भी जाति के आधार पर होता है. दरअसल, वहां आज तक जातिगत आधार पर ही विकास को...
More »सबसे बड़े लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शनों की आवाज़ क्यों नहीं सुनी जाती?- माधव शर्मा
जयपुर: देश में चुनाव हो रहे हैं. हर तरफ लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, संविधान की रक्षा और विकास जैसे शब्द कई तरह के नारों के साथ हर रोज़ सुनाई दे रहे हैं, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र इन शब्दों को सही मायनों में ज़मीन पर उतारने में लगभग नाकाम ही रहा है. स्वस्थ लोकतंत्र में संवैधानिक हक़ के तौर पर देश के नागरिकों को मिले शांतिपूर्वक विरोध, धरने और प्रदर्शनों के...
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