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चर्चा में.... | ऐसे हासिल होगी हर घर को बिजली

ऐसे हासिल होगी हर घर को बिजली

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published Published on Aug 23, 2010   modified Modified on Aug 23, 2010

बिजली सबको हासिल हो- क्या यह बस एक दिवास्वप्न है। क्या जब तक सबको रोटी,कपड़ा,मकान, शिक्षा,स्वास्थ्य और साफ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधायें हासिल नहीं हो जातीं तब तक हमें सबके पास बिजली पहुंचाने के सवाल को ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए। 

भारत में बिजली की सुविधा से वंचित लोगों की तादाद दुनिया में सबसे ज्यादा है। देश में आधे से ज्यादा घरों में बिजली नहीं है यानी दूसरी तरह से कहें तो  विश्व के बिजली-वंचित लोगों की कुल तादाद का एक तिहाई हिस्सा सिर्फ भारत में मौजूद है।एक तथ्य यह भी है कि पिछले दशक में बिजली के उत्पादन में 60 फीसदी की बढोत्तरी हुई है, बावजूद इसके बिजली से रौशन घरों की तादाद में महज 10 फीसदी की ही बढोत्तरी हो सकी है। इसका सीधा अर्थ निकलता है कि बिजली के बढ़े हुए उत्पादन का अधिकांश मौजूदा उपभोक्ताओं के ही काम आया और जो बिजली वंचित थे वे उसी हाल में रहे।

प्रयास एनर्जी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत एक हालिया अध्ययन में सबके लिए बिजली के मुद्दे को बड़ी गहराई से उठाया गया है। इलेक्ट्रिसिटी फॉर ऑल- टेन आईडियॉज टुआर्डस् टर्निंग रेटॉरिक इनटू रियल्टी नामके इस 40 पेजी अध्ययन(देखें नीचे दी गई लिंक) में शीर्षक के अनुरुप ही बड़े साफ-साफ शब्दों में कहा गया है कि बिजली का सबको मिलना और इस जरुरत भर का उत्पादन कोई हिमालय लांघने सरीखा काम नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल उपभोक्ताओं को बिजली देने के मामले में रवैया, जैसे भी हो रहा है ठीक हो रहा है, वाला है जबकि इस टालू रवैये की जगह अर्जैंसी भरा रवैया अपनाने और नए किस्म के पहल की जरुरत है। ऐसे उपायों में शामिल है- नीतिगत और ढांचागत स्तर पर कुछ बुनियादी किस्म के बदलाव करना। ऐसे बदलावों में समय तो लगेगा लेकिन कुछ उपाय ऐसे भी हैं जिन्हें मौजूदा ढांचे में ही तुरंत फुरंत किया जा सकता है।

दरअसल, कुछ उपाय तो कई राज्यों में किए भी जा रहे हैं लेकिन बाकी राज्यों में अभी इन उपायों पर अमल किया जाना शेष है। नीचे संक्षेप में अध्ययन में बताये गए दस उपायों की चर्चा की जा रही है जिन पर हाथ के हाथ अमल किया जा सकता है-

1. 100 X 100 कनेक्शन ड्राइब- कुआं प्यासे के पास जाये तो बेहतर

जहां पावर लाइन है वहां से 100 मीटर के दायरे में मौजूद हर उपभोक्ता से बिजली देने वाली संस्था यह सुविधा फराहम करने के लिए संपर्क करे। फिलहाल यह जिम्मा उपभोक्ताओं पड़ छोड़ा गया है कि जरुरत हो तो आकर ले लो। इस युक्ति के लिए जरुरी होगा प्यासा कुआं के पास जाय की मौजूदा मानसिकता में बदलाव।

2. बिजली दरों को युक्तिसंगत बनाया जाय- गरीब के लिए न्यायसंगत दरें तय हों

जो उपभोक्ता बिजली की बड़ी खपत में काम चला लेता है या फिर जो उपभोक्ता गरीबी रेखा से नीचे है उसके लिए बिजली उपभोग के शुल्क खासतौर से न्यायसंगत बनाये जाने चाहिए।

3. लोड शेडिंग के मामले में पारदर्शिता- ऐसा ना हो कि कहीं लोडशेडिंग का लोड हो और कहीं 24 घंटे बिजली जगमगाए

बिजली की कमी में भी सबकी बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए। इसके लिए पारदर्शिता और ईमानदारी से पहल करने के साथ ही लोडशेडिंग के बारे में सबको कारगर ढंग से जानकारी प्रदान करने की जरुरत है।लोडशेडिंग के रेग्यूलेशन के लिए कुछ राज्यों ने संस्थाएं भी बनायी हैं।

4.गरीबों के लिए अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट

पिछड़े इलाके पिछड़ेपन के मामले में एक दुष्चक्र का शिकार हैं- लोडशेडिंग से विकासकार्य बाधित होता है और विकासकार्य बाधित होने से लोडशेडिंग और बढ़ती है। इसका एकमात्र तरीका है देश के पिछड़े जिलों के लिए अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट बनाना ताकि गरीब इस दुष्चक्र से निकल सकें।

5. बिलिंग का काम कोई तीसरा करे-

जो उपभोक्ता पूरी ईमानदारी से बिजली-बिल चुकाते हैं, खासकर गरीब तबका, उसके लिए एक बड़ी समस्या बिजली-मीटर की खराबी और बिलिंग के मामले में हुई गड़बडियों की है। बिजलीप्रदाता संस्था इसके लिए जिम्मेवार है, इसलिए बिलिंग-मीटरिंग का काम किसी तीसरे के जिम्मे हो तो बेहतर।

6. शिकायतों का निपटारा कारगर ढंग से हो- उपभोक्ता के दरवाजे तक पहुंचें

इसके लिए एक ऐसे फोरम का होना जरुरी है जो गरीबो का पक्षधर हो। इस मामले में सेवा-सुधार पहली जरुरत है। फिलहाल शिकायतों के निपटारे की जो व्यवस्था है उसकी प्रक्रियाएं बहुतों के लिए अनजानी हैं।

7. राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का पुनरावलोकन हो

लोगों की भागीदारी बढाने और योजना को बेहतर बनाने के लिए भारत की इस सबसे बड़ी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना की सार्वजनिक समीक्षा जरुरी है।

 8.गरीबों की सुनो- उनकी बातों को नीतियों में जगह दो

बिजली के उपभोग के संबंध में नियमन की  प्रक्रियाओं से लोगों की नियमनकारी फोरमों में भागीदारी बढ़ती है, इसमें जनसुनवाई भी शामिल है। लेकिन, लोगों की भागीदारी ऐसे फोरमों में बड़ी कम है। इसमें बदलाव होना चाहिए।

9. चिराग तले अँधेरा

हमारे विकास का एक अफसोसनाक पहलू यह है कि कई जगहों पर जो घर पावरहाऊस के नजदीक हैं उनमें भी बिजली नहीं है। पावरहाऊस के नजदीक के गरीब घरों में बिजली पहुंचाने का काम प्राथमिकता के तौर पर किया जाय। इसे बिजली-परियोजना का हिस्सा बनाया जाय।

10.जो काम जिसे पता है वही करेगा, जो नहीं जानता वह भला कैसे करेंगा- छोटे उपभोक्ताओं के लिए डेटा-विश्लेषण

छोटे उपभोक्ताओं से संबंधित आंकड़ों की उगाही और विश्लेषण के काम में बड़ी खामियां हैं। ना तो यह  ठीक-ठीक पता है कि वे कितनी बिजली की खपत करते हैं और ना ही यह कि उन्हें बिजली कितनी देर तक मिलती है या फिर यह कि किस वक्त उनके घरों में बिजली की खपत ज्यादा होती है किस वक्त कम। मौजूदा सीईसी नाम की एजेंसी को चाहिए कि वह ऐसे आंकड़ों को नियमित करे और उनकी कवरेज बढ़ाये।


इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए देखें निम्नलिखित लिंक-


Electricity for all: Ten ideas towards turning rhetoric into reality, Prayas Energy Group
xa.yimg.com/kq/groups/8951350/1939291332/name/ElectricityForAll.pdf

India’s energy programme is anti-poor and carbon-intensive, Greenpeace, 17 November, 2009,

http://www.greenpeace.org/india/press/releases/india-s-ene
rgy-programme-is-an

Rice husk power to light up villages, Live Mint, 21 July, 2010,

http://www.livemint.com/2010/07/21185202/Harsh-ground-real
ities-could-t.html

Rural electricity to speed up inclusion, The Economic Times, 27 May, 2010,

http://economictimes.indiatimes.com/news/economy/policy/Ru
ral-electricity-to-speed-up-inclusion/articleshow/5978914.
cms

Will India be the world's fastest growing economy?, Rediff.com, 8 June, 2010,

http://business.rediff.com/slide-show/2010/jun/07/slide-sh
ow-1-will-india-be-the-worlds-fastest-growing-economy.htm

20 m. solar lights planned by 2022 by Sujay Mehdudia, The Hindu, 12 January, 2010,

http://www.hindu.com/2010/01/12/stories/2010011255281100.htm

‘Green’ electricity for Bihar villages by N Gopal Raj, The Hindu, 24 November, 2009,

http://www.hindu.com/2009/11/24/stories/2009112455240900.htm

India to Spend $900 Million on Solar by Vishal Bajaj, The New York Times, 20 November, 2009, http://greeninc.blogs.nytimes.com/2009/11/20/india-to-inve
st-900-million-in-solar/?scp=3&sq=india&st=cse

Why Bharat isn’t India by Paranjoy Guha Thakurta, The Asian Age, 23 November, 2009,

http://www.asianage.com/presentation/leftnavigation/opinio
n/op-ed/why-bharat-isn’t-india.aspx

 
 

 

 



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