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चर्चा में.... | किसमें कितना है दम-- कोका-कोला और ग्राम पंचायतों की जंग

किसमें कितना है दम-- कोका-कोला और ग्राम पंचायतों की जंग

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published Published on Nov 28, 2015   modified Modified on Nov 28, 2015

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनावी अखाड़े के रुप में पिछले साल सुर्खियों में रहा बनारस इस साल जनसंघर्षों के कारण चर्चा में है.

 

इलाके के 18 ग्राम पंचायतों ने उत्तरप्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि मेहदीगंज स्थित कोका-कोला संयंत्र को भूजल के दोहन से तत्काल रोका जाय.(देखें नीचे दी गई लिंक).

 

भूजल के दोहन की मांग करने वाले ग्राम पंचायत मेहदीगंज स्थित कोका-कोला बॉटलिंग संयंत्र के पाँच किलोमीटर दायरे में बसे गांवों के हैं. उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कोका-कोला बॉटलिंग संयंत्र सन् 1999 से इलाके में भूजल का दोहन कर रहा है.

 

ग्राम-पंचायतों की यह मांग उस वक्त सामने आयी है जब भूजल की निगरानी की शीर्ष संस्था सेंट्रल ग्राऊंड वाटर ऑथॉरटी(सीडब्ल्यूजीए) ने पानी के दोहन के संबंध में नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

 

16 नवंबर 2015 से प्रभावी हो चुके इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि भूजल का उपयोग करने वाले किसी उद्योग ने अगर सीडब्ल्यूजीए की अनुमति नहीं ली है तो उसे आवेदन भेजकर अपने संचालन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा चाहे उनकी स्थापना को कितने भी साल क्यों ना बीत गये हों. नागरिक संगठनों का मानना है कि नये दिशा-निर्देशों से ग्राम-पंचायत की मांग को बल मिलेगा.( देखें नीचे दी गई लिंक)

 

जीविका के लिए मुख्य रुप से खेती-बाड़ी और पशुपालन पर आधारित मेहदीगंज इलाके के ग्रामीण समुदाय की बरसों से शिकायत रही है कि बॉटलिंग संयंत्र के कायम होने के बाद से गांवों में सिंचाई और पेयजल की कमी हो गई है. सरकारी आंकड़े से भी ग्रामीणों की इस शिकायत की तस्दीक होती है.

 

देश में भूजल के दोहन की निगरानी की सर्वोच्च संस्था सेंट्रल ग्राऊंड वाटर बोर्ड ने 1999 में बॉटलिंग संयंत्र की मौजूदगी वाले प्रखंड अराजीलाइन को भूजल की मात्रा के लिहाज से ‘ सुरक्षित ’(सेफ) करार दिया था. दस साल बाद(2009) इलाके को भूजल की मौजूदगी के लिहाज से सेंट्रल वाटर बोर्ड ने ‘संकटग्रस्त’ श्रणी में रखा जबकि बीते साल अराजीलाइन प्रखंड को भूजल की मात्रा की मौजूदगी के लिहाज से ‘अति-संकटग्रस्त’( ओवर-एक्सप्लाइटेड) करार दिया गया.( देखें नीचे दी गई लिंक)

 

सेंट्रल ग्राऊंड वाटर ऑथॉरिटी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक जिन इलाकों में भूजल की मात्रा ओवर-एक्सप्लाइटेड करार दी गई है वहां बॉटलिंग संयंत्र चलाने की मनाही है. नागरिक संगठनों के प्रयासों से बीते साल मेहदीगंज स्थित कोका-कोला के बॉटलिंग संयंत्र के विस्तार की योजनाओं पर रोक लगाने में सफलता मिली थी.

 

गौरतलब है कि इलाके के 15 ग्राम-पंचायतों ने बॉटलिंग संयंत्र की विस्तार की योजनाओं को रोकने के लिए 2013 में भी सरकार से मांग की थी. उस वक्त कोका-कोला संयंत्र ने केंद्र और राज्य सरकार से कहा था कि उसे सालाना 50 हजार क्यूबिक मीटर की जगह 2 लाख 50 हजार क्यूबिक मीटर पानी के दोहन की अनुमति दी जाय. (देखें नीचे दी गई लिंक)

 

सेंट्रल ग्राऊंड वाटर बोर्ड की शब्दावली में अति-संकटग्रस्त का अर्थ होता है संचित जल भंडार से जिस मात्रा में पानी का दोहन हो रहा है उस मात्रा में पानी की भरपाई नहीं हो पा रही है. बोर्ड ने भूजल की मौजूदगी को मात्रा के लिहाज से चार श्रेणियों —सेफ, सेमी-क्रिटिकल, क्रिटिकल और ओवर-एक्सप्लाइटेड में बांटा है. कोका-कोला के मौजूदा संयंत्र को सरकार ने बीते साल जून महीने में भूजल के दोहन के संबंध में नियमों का पालन नहीं करता पाकर बंद कर दिया था लेकिन संयंत्र के अधिकारियों ने इस पाबंदी से बचने के लिए अदालत से स्टे-आर्डर ले लिया.

 

इस कथा के विस्तार के लिए देखें निम्नलिखित लिंक--

http://www.indiaresource.org/campaigns/mehdiganj/Letters/M
ehdiganjPanchayatLettersNov262015.pdf

 

http://www.indiaresource.org/campaigns/mehdiganj/Letters/C
GWALETTERAug272014Najeeb.pdf

 

http://www.indiaresource.org/news/2015/1026.html

 

http://www.indiaresource.org/news/2014/1031.html

 

http://www.indiaresource.org/news/2013/1008.html

 

http://www.indiaresource.org/news/2014/1027.html

 

 



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