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चर्चा में.... | खाद्य-सुरक्षाः कैश ट्रान्सफर की हड़बड़ी में है सरकार?

खाद्य-सुरक्षाः कैश ट्रान्सफर की हड़बड़ी में है सरकार?

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published Published on Feb 24, 2015   modified Modified on Feb 24, 2015

आशंका जतायी जा रही है कि सरकार जल्दी ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर का तरीका अपना सकती है।


सार्वजनिक वितरण प्रणाली में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर का तरीका अपनाने की आशँका को दो सरकारी चिट्ठियों से बल मिला है। ये चिट्ठियां बीते 10 फरवरी और 11 फरवरी के दिन खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव को लिखी गई हैं।


10 तारीख को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि केंद्र सरकार प्रदेशों के कुछ जिलों तथा केंद्रशासित क्षेत्रों में प्रायोगिक तौर पर पीडीएस में खाद्यान्न की जगह नकदी देने की योजना पर अमल करना चाहती है।


गौरतलब है कि हाल ही में शांताकुमार की अगुवाई में बनी एक उच्चस्तरीय समिति ने भारतीय खाद्य निगम के कामकाज में सुधार से संबंधित अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि सरकार को पीडीएस में खाद्यान्न की जगह नकदी हस्तांतरण का तरीका जल्दी से जल्दी अपनाना चाहिए।


10 फरवरी के दिन लिखी गई चिट्ठी में पीडीएस के लाभार्थियों को खाद्यान्न की जगह नकदी देने के बारे में तीन तरीके सुझाए गए हैं। पहले तरीका लाभार्थी के बैंक खाते में खाद्यान्न पर जारी सब्सिडी की रकम के हस्तांतरण का है यानि लाभार्थी बैंक खाते में हासिल रकम से अपनी मनचाही जगह खरीदारी करने के लिए आजाद है।


दूसरा तरीका सरकारी राशन दुकानदारों को न्यूनतम समर्थन मूल्य या फिर बाजार-मूल्य पर खाद्यान्न देने का है। लाभार्थी यह खाद्यान्न एक निर्धारित मूल्य चुकाकर खरीदेगा और हर खरीदारी किसी उचित प्रौद्योगिकी के सहारे रिकार्ड रखा जाएगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य या फिर निर्धारित मूल्य तथा केंद्र द्वारा खाद्यान्न जारी करने के मूल्य के बीच अगर कोई अन्तर है तो राशि का यह अन्तर जोड़कर लाभार्थी के खाते में खरीदारी से पहले भेजा जाएगा।


तीसरा तरीका मौजूदा तरीके को जारी रखने का है जिसमें खाद्यान्न को सीधे लाभार्थी के हाथ में दिया जाता है लेकिन इस तरीके के अन्तर्गत चिट्ठी में कहा गया है कि हर खरीदारी का आधार-कार्ड के जरिए रिकार्ड रखा जाएगा।


गौरतलब है कि शांता कुमार की अगुवाई में बनी समिति की सिफारिशों में यह भी कहा गया था कि जब तक खाद्यान्न जारी करने से लेकर खाद्यान्न को लाभार्थी के हाथ में पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया का कंप्यूटरीकरण नहीं कर लिया जाता तब तक खाद्य-सुरक्षा अधिनियम को लागू नहीं किया जाये। ऐसे में जिन राज्यों में पीडीएस को सुधारने के काम चले हैं वहां पूरी सुधार-प्रक्रिया के रुकने की आशंका है।(देखें ज्यां द्रेज का लेख)


आधिकारिक चिट्ठी के तथ्यों से यह स्पष्ट नहीं होता कि लाभार्थी की वास्तविक खरीद-क्षमता को बनाये रखने के लिए नगदी के हस्तांतरण को मुद्रास्फीति से जोड़कर देखा जाएगा कि नहीं हालांकि शांताकुमार समिति ने भारतीय खाद्य निगम के प्रबंधन में सुधार से संबंधित अपनी रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की थी।
इस सिलसिले में यह भी गौरतलब है कि खाद्य-सुरक्षा के मसले पर सक्रिय नागरिक संगठन महंगाई के मद्देनजर लाभार्थी के बैंक खाते में नगदी हस्तांतरण को मुद्रास्फीति की घट-बढ़ से जोड़कर तय करने की बात कहते रहे हैं।

इस कथा के विस्तार के लिए निम्नलिखित लिंक देखे जा सकते हैं-

 

Report of the High level Committee on Reorienting the Role and Restructuring of Food Corporation of India, January 2015 (Please click here to access) 

Leakages from the Public Distribution System (PDS) and the way forward - Ashok Gulati and Shweta Saini (2015), ICRIER (Please click here to access) 

The National Food Security Act 2013 (Please click here to access)

The National Food Security Ordinance 2013 (Please click here to access)

Address by the President of India, Shri Pranab Mukherjee to the Joint Session of both houses of Parliament , Press Information Bureau, 23 February 2015, www.pib.nic.in

Centre takes steps to convert PDS to cash transfers -Nitin Sethi & Surabhi Agarwal, Business Standard, 24 February, 2015

Prof. Jean Dreze, noted economist and former member of th
e National Advisory Council
, interviewed by Mayank Mishra, Business Standard, 23 February, 2015 

 

Understanding Leakages in the Public Distribution System -Jean Dreze and Reetika Khera, Economic and Political Weekly, Vol-L, No. 7, February 14, 2015 


Food insecurity -TK Rajalakshmi, Frontline, 6 March, 2015 

'Changes in PDS may affect food security of half of Indians

FCI reforms: prescription to cure or kill? -Roshan Kishore, Livemint.com, 27 January, 2015 

Water For The Leeward India -Jean Dreze and Reetika Khera, Outlook, 24 March, 2014

Public Distribution System Reforms and Consumption in Chh
a ttisgarh
-Prasad Krishnamurthy, Vikram Pathania, and Sharad Tandon, Economic and Political Weekly, Vol-XLIX, No. 8, February 22, 2014 

Ajay Chhibber, Director General of the IEO, a former assistant secretary general of the UN Development Programme, interviewed by Sanjeeb Mukherjee, Business Standard, 3 February, 2014   

Rural Poverty and the Public Distribution System-Jean Dreze and Reetika Khera, Economic and Political Weekly, Vol-XLVIII, No. 45-46, November 16, 2013  

Reforming the Public Distribution System: Lessons from Chhattisgarh by Raghav Puri, Economic and Political Weekly, February 4, 2012 

Revival of the Public Distribution System -Reetika Khera, Economic and Political Weekly, November 5, 2011, Vol xlvi, No. 44 & 45 

Trends in diversion of PDS grain -Reetika Khera (2011), Working Paper No. 198, Centre for Development Economics, Department of Economics, Delhi School of Economics
    
PEEP survey 2013 and PDS Survey 2011  

 

 

 



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