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न्यूज क्लिपिंग्स् | उर्जा वन में नहीं अंकुरित हुए बीज, एक पौधा भी नहीं उगा, लाखों की राशि हुई बेकार

उर्जा वन में नहीं अंकुरित हुए बीज, एक पौधा भी नहीं उगा, लाखों की राशि हुई बेकार

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published Published on Jan 17, 2018   modified Modified on Jan 17, 2018
बैतूल। जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को जलाऊ लकड़ी मुहैया कराए जाने के लिए उर्जावन तैयार करने के नाम पर जिले में सरकारी राशि को पलीता लगाने का मामला सामने आया है। जिले के पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली 5 रेंजों में वन विभाग ने 28 उर्जावनों में विभिन्न प्रजातियों के पेड़ तैयार करने के लिए बीज खरीदकर बुवाई की थी लेकिन बमुश्किल आधा दर्जन स्थानों को छोड़कर कहीं भी एक पौधा भी नहीं उग पाया है।


मामले की कलई खुलने के बाद अब जिम्मेदार अफसर बारिश पर दोष मढ़ते हुए कह रहे हैं कि पानी कम बरसने से बीज नहीं उग पाया। उर्जावनों के नाम पर तैयार की गई जमीन पर एक भी पौधा नजर नहीं आ रहा बल्कि घांस जरूर उग आई है।


बैतूल वन वृत्त के अंतर्गत आने वाले पश्चिम वन मंडल में जुलाई महीने में उर्जावन तैयार करने के लिए करीब 15 लाख रुपए का बीज खरीदा गया था। इसमें बबूल, सू बबूल और प्रोसोपीस नामक प्रजाति के बीज शामिल थे। वन विभाग के मैदानी अमले की मदद से बारिश शुरू होते ही बीज की बुवाई करा दी गई लेकिन गुणवत्ता खराब होने के कारण कहीं भी एक बीज से भी अंकुरण नहीं हो पाया। बीज की गुणवत्ता पर सवाल खड़े न हों इसके लिए वन विभाग के अफसरों ने अल्पवर्षा होने का कारण बताना शुरू कर दिया। हालांकि उर्जावनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने खानापूर्ति करने के लिए निम्न गुणवत्ता का बीज खरीद डाला और बुवाई करा दी थी। इसी वजह से किसी भी उर्जावन में एक भी पौधा तैयार नहीं हो पाया है।


5 रेंजों में 28 उर्जावन तैयार होने थे


पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली गवासेन, मोहदा, तावड़ी, सांवलीगढ़ और चिचोली रेंज में 28 उर्जावन तैयार करने के लिए स्थान चिन्हित किए गए थे। वन ग्रामों में रहने वाले लोगों को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की मंशा से तैयार किए जाने वाले उर्जावनों में गुणवत्ताविहीन बीज की बुवाई करने के कारण लाखों की राशि को पलीता लगा दिया गया।


5 हेक्टेयर का है एक प्लांटेशन


पश्चिम वन मंडल के अंतर्गत आने वाली सभी रेंजों में ऊर्जावन तैयार करने के लिए हर प्लांटेशन में 5 हेक्टेयर का क्षेत्र चिन्हित किया गया था। इसमें 5 क्विंटल बीज की बुवाई की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्लांटेशन क्षेत्र के अलावा रेंज की हर बीट में खोदी गई सीपीटी पर भी बीज की बुवाई की गई ताकि पौधे तैयार होने के बाद ग्रामीणों को जंगल के बाहर ही ईंधन के लिए जलाऊ लकड़ी उपलब्ध हो सके और वे भीतर घुसकर सागौन की कटाई न करें।


बीज की खरीदी पर उठे सवाल


पश्चिम वन मंडल की पांच रेंजों में 28 प्लाटेशनों के लिए शू बबूल, बबूल और प्रोसोपीस के पौधे तैयार करने के लिए बीज की खरीदी करने पर भी सवाल उठ रहे हैं। वन सुरक्षा समितियों के सदस्यों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बिना टेंडर बुलाए लाखों रुपयों का बीज खरीद लिया गया। ऊर्जावनों में प्लांटेशन के लिए बैतूल और सिवनी के व्यापारियों से करीब डेढ़ सौ क्विंटल बीज की खरीदी की गई है। बीज की गुणवत्ता खराब होने के कारण उसमें अंकुरण नहीं हो पाया।


बारिश नहीं हुई तो नर्सरी में कैसे तैयार हुए पौधे


पश्चिम वन मंडल की वन सुरक्षा समितियों के सदस्यों का आरोप है कि उर्जावनों में एक भी पौधा न उगने के लिए वन विभाग के अफसर बारिश न होने का कारण बता रहे हैं। जबकि इसी वन मंडल में वन विभाग के द्वारा स्थापित की गईं नर्सरियों में सागौन के लाखों पौधे तैयार किए गए हैं। यदि बारिश नहीं होती तो सागौन के पौधे भी नहीं उगते और न ही किसानों के खेतों में फसल तैयार हो पाती। इधर वन विभाग का मैदानी अमला भी बीज की गुणवत्ता खराब होने का हवाला दे रहा है।


बीज की बुवाई करने के बाद बारिश नहीं हुई


उर्जावनों में बीज का अंकुरण न होने के संबंध में गवासेन रेंज के रेंजर जय धुर्वे का कहना है कि बारिश नहीं हुई थी इस कारण से बीज नहीं उग पाया। किसानों के खेत में फसल उगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बीज की गुणवत्ता तो अच्छी थी बस बारिश नहीं हुई इस कारण जंगल में बीज नहीं उगा।


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