-रूरल वॉइस, अब देश के नीति निर्माताओं को अभी की जरूरत, वर्तमान संकट का उपाय जैसे शब्दों को नकार कर देश की समस्याओं के लिए स्थायी समाधान तलाशने होंगे। भ्रष्टाचार, निरक्षरता, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली, गरीबी, जलवायु परिवर्तन, घटता भूजल स्तर, वायु प्रदूषण, ठोस अवशेष, महिला सशक्तीकरण, बेरोजगारी, कृषि संकट, बाढ़, सुखाड़, लंबित न्याय, सकल घरेलू उत्पाद आदि मुद्दे आज देश के सामने हैं जिनको प्राथमिकता के आधार पर हल...
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उज्जवला योजनाः कश्मीर में ग्रामीण महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है फायदा, विपक्ष ने लगाया घोटाले का आरोप
-गांव कनेक्शन, मिट्टी के चूल्हे 'दांबूर' के पास बैठी अधेड़ उम्र की फातिमा की आंखे धुएं से जल रही हैं। अपनी आंखों से आते पानी को रगड़ते हुए वह लगातार खांस रही हैं। उनके दिन का एक बड़ा हिस्सा, रोजाना यूं ही धुएं से भरी रसोई में परिवार के लिए खाना पकाने में बीतता है। हालांकि रोजाना होने वाली इस परेशानी से बचने के लिए फातिमा ने रसोई गैस कनेक्शन का...
More »जासूसी के उपकरणों को खरीदने के प्रस्ताव ने बीसीसीआई के अंदर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं
-न्यूजलॉन्ड्री, गुप्त ऑडियो रिकॉर्डर, छुपे कैमरे, मोबाइल फॉरेंसिक उपकरण, अच्छे रेजोल्यूशन वाली दूरबीनें. यह भारत में बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट या बीसीसीआई की खरीदारी की सूची की हैं, जो विश्व भर से इनको खरीदने की तैयारी कर रहा है- कथित तौर पर "फिक्सिंग करने वालों को ठीक करने के लिए." यह ऐसा, 4 दिसंबर को कोलकाता में सालाना जनरल मीटिंग के दौरान भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सीईओ हेमांग अमीन के द्वारा दिए...
More »मतदाता पहचान कार्ड, सूची को आधार से जोड़ने सहित चुनाव सुधार संबंधी विधेयक को लोकसभा की मंजूरी
-न्यूजक्लिक, लोकसभा ने सोमवार को निर्वाचन विधि (संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी प्रदान कर दी। इसमें मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता पहचान कार्ड और सूची को आधार कार्ड से जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को चुनाव सुधारों से जुड़े इस विधेयक के मसौदे को अपनी मंजूरी दी थी। इस विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि मतदाता सूची में दोहराव...
More »जलवायु संकट पर अमीर देशों और भारत के ताकतवर लोगों के भरोसे रहना बड़ी भूल
-कारवां, हाल ही में 31 अक्टूबर और 12 नवंबर के बीच ग्लासगो में संपन्न हुई जलवायु परिवर्तन की 26वीं अंतर्राष्ट्रीय वार्ता में भारत सहित कई विकासशील देशों ने जलवायु न्याय का मुद्दा उठाया. इन देशों की मांग वाजिब है क्योंकि बैंगलुरु के राष्ट्रीय प्रगत अध्ययन संस्थान की डॉक्टर तेजल कानिटकर के अनुसार, विश्व के सबसे धनी देश 1990 में अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन के समझौतों पर चर्चा शुरू होने तक जलवायु परिवर्तन...
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