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'डिजिटल सर्विलांस' के मसले पर हिंदुस्तानी मीडिया का रुख क्या है?

टाइम्स ऑफ इंडिया और दैनिक जागरण की खबरों में दिखा सर्विलांस के प्रति समर्थन!   पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ‘निजता के अधिकार’ को मौलिक अधिकारों की श्रेणी में रखा है। लेकिन, आए दिन ये खबरें आती रहती हैं कि आज सरकार की ओर से या सरकार की किसी ‘खास एजेंसी’ की ओर से राष्ट्रहित में या व्यापक जनहित में फ़लाँ व्यक्ति पर या किसी संस्था पर सर्विलांस किया गया! मीडिया...

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महामारी में मजहब के आधार पर हुआ भेदभाव- वैश्विक रिपोर्ट

बात कोविड काल की है। अफगानिस्तान में बहुसंख्यक तबके ने करीब 25 सिखों को मौत के घाट उतार दिया। और इस कारण से सिखों में डर पसरा। जिसका नतीजा था लगभग 200 सिक्खों का हिंदुस्तान की ओर पलायन। यह पलायन उनकी ख्वाहिश से नहीं मजबूरी से उपजा था। प्रश्न यह है कि सिखों के साथ यह अत्याचार क्यों हो रहा था? अफगानिस्तान के बहुसंख्यक तबके का कहना था कि सिख कोविड...

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'अनिश्चित न्याय:उत्तर पूर्व दिल्ली में 2020 में हुई हिंसा पर एक नागरिक समिति की रिपोर्ट'; कौंस्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप ने की जारी

16 अक्टूबर, कौंस्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप प्रेस विज्ञप्ति प्रिय मीडियाकर्मी, कौंस्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं के भूतपूर्व सिविल सेवकों का समूह है। हमने केंद्रीय और विभिन्न राज्य सरकारों में काम किया है। हम एक ऐसी नागरिक संस्कृति के संवर्धन के लिए प्रयत्नशील हैं, जो भारतीय संविधान में निहित आचार के दायरे में रहे। सामूहिक रूप से हम  किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हैं, क्योंकि हम तटस्थता में दृढ़ विश्वास रखते हैं। उत्तर पूर्व...

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बिहार: अपने विभाग में भ्रष्टाचार की बात स्वीकारने वाले कृषि मंत्री का इस्तीफ़ा

द वायर, 2 अक्टूबर बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया है. उनके पिता एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की बिहार इकाई के अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने रविवार को इसकी जानकारी दी. सुधाकर सिंह द्वारा हाल ही में अपने विभाग में भ्रष्टाचार की बात स्वीकार करने से प्रदेश की नवगठित महागठबंधन सरकार को काफी फजीहत झेलनी पड़ी थी. हालांकि इस कठोर कदम के बाद मंत्री अपनी टिप्पणियों...

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मिल्क बॉयकाट, धरना- कैसे मालधारियों के आगे गुजरात सरकार को ‘काले’ मवेशी कानून मामले में झुकना पड़ा

दिप्रिंट, 27 सितम्बर गुजरात में काफी शक्तिशाली माने जाने वाले मालधारी समुदाय को भूपेंद्र पटेल सरकार को विवादास्पद आवारा पशु नियंत्रण विधेयक, या उनके शब्दों में एक काले बिल की वापसी के लिए बाध्य करने में छह महीने लग गए. और इस मामले में दबाव बनाने की पुरानी रणनीतियां ही उनके काम आईं, जिसमें मिल्क बॉयकाट, राजनीतिक स्तर पर चेताना, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स जैसे सोशल...

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