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कड़वे बादाम : दिल्ली के बादाम उद्योग में मज़दूरों का शोषण

  उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दूर-दराज़ कोने में बसी हुई, शोर-ग़ुल और चहल-पहल भरी करावलनगर की बस्ती, अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों का एक उभरता हुआ केन्द्र है, जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर और उनके परिवारों को रोज़गार मिलता है। ये उद्यम किसी भी मानक से छोटे नहीं है। वैश्विक सम्‍बन्‍धों की जटिल श्रृंखला में बँधे ये उद्यम, सालभर चालू रहते हैं और हज़ारों मज़दूरों के रोज़गार का स्रोत हैं। कई करोड़...

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किसानों को 7500 यूनिट बिजली फ्री

रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में यहां मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में किसानों को हर वर्ष 7500 यूनिट बिजली मुफ्त देने का निर्णय लिया गया। यह बिजली पांच हार्स पावर तक के सिंचाई पंपों पर दी जाएगी। इससे राज्य शासन पर सालाना 255 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। प्रत्येक कृषक परिवार के एक सदस्य को तीन हॉर्स पावर तक 6000 यूनिट और 3 हॉर्स पावर से...

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यहां कुख्यात अपराधी के पांव छू कर दिन की शुरुआत करते हैं ग्रामीण

नवगछिया. बिहार के नवगछिया अनुमंडल के बिहपुर प्रखंड अन्तर्गत हरियो गांव के चौक पर एक प्रतिमा स्थापित है जिसके पैर छूकर अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हैं यहां के ग्रामीण। हैरानी की बात है कि यह प्रतिमा किसी संत पुरुष की नहीं बल्कि कुख्यात अपराधी सरगना तेतुली उर्फ तुतली सिंह की है। जिसकी आज से 14 साल पूर्व पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गयी थी। ग्रामीणों की नजर में तुतली सिंह...

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मनरेगा का कायाकल्प- मिहिर शाह समिति की सिफारिशें

रोजगार के लिए अर्जी देने वाले लोगों को साल में प्रति दिन 100 रुपये की मजदूरी के हसाब से अधिकतम 100 दिन के काम की गारंटी देने वाले कार्यक्रम मनरेगा का योजना आयोग के सदस्य मिहिर शाह की आध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर कायाकल्प होने जा रहा है। उन सिफारिशें का जिक्र नरेगा-2.0 कहलाने वाले महात्मा गांधी नेशनल रुरल एम्पलॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005- ऑपरेशनल गाईडलाइन्स नामक...

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असम के चाय-बागान में भुखमरी से मौत

इतिहासकार बताते हैं कि अंग्रेजीराज के समय देश के पूर्वोत्तर के चाय-बागानों में काम करने वाले मजदूर बड़ी दीन-दशा में थे, तकरीबन बंधुआ मजदूर की दशा में। आजादी के बाद, इनकी दशा कुछ सुधरी। गुजरे कुछ दशकों में देश के चाय-उद्योग ने उन सालों में भी मुनाफा कमाया जिन सालों को आर्थिक-प्रगति के लिहाज से बेहतर नहीं माना जाता। ठीक इसी कारण, असम के चाय-बागानों से आने वाली भुखमरी की...

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