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नारी पूजक देश में सारी गालियां महिलाओं के नाम पर ही क्यों हैं?

-सत्यहिंदी, सोशल मीडिया पर दो तरह के लोग सक्रिय हैं। एक वे जो लिखते हैं और दूसरे जो बकते हैं। लिखने वाले लोग अच्छा भी लिखते हैं और बुरा भी। लेकिन बकने वाले लोग बस बकते हैं। और जो वे बकते हैं वे अपने से असहमत लोगों से बहुत ‘मधुरता’ से संवाद करते हैं। ऐसी मधुरता कि आप ‘सुन्न’ हो जाएं। यहां सबसे ज्यादा स्थान ‘मां और बहन’ को दिया जाता...

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पंजाब के 6733 लापता लोगों की जानकारी जुटाने वाले वकीलों पर क्राइम ब्रांच का शिकंजा

-कारवां, गृह मंत्रालय द्वारा सूचना और प्रसारण मंत्रालय को ब्रिटेन के वकील सतनाम सिंह बैंस के बारे में जानकारी भेजने के लगभग दो साल बाद 19 अप्रैल को चंडीगढ़ पुलिस ने बैंस के खिलाफ एफआईआर दर कर ली है. सतनाम ने 2008 में सिविल सोसाइटी ग्रुप पंजाब डॉक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट (पीडीएपी) की स्थापना की थी. पीडीएपी का उद्देश्य पंजाब में अशांति से भरे 1984 और 1995 के बीच के सालों में...

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गरीबी, भूख और लॉकडाउन

-न्यूजक्लिक, नरेंद्र मोदी ने, 24 मार्च 2020 को एलान किया था कि चार घंटे के बाद से, देश भर में पूर्ण लॉकडाउन लागू हो जाएगा! यह देशव्यापी लॉकडाउन मई के आखिर तक चलने जा रहा था। इसके बाद भी स्थानीय लॉकडाउन तो बने रहे पर, देशव्यापी आम लॉकडाउन नहीं हुआ। लॉकडाउन से करोड़ों मेहतनकश गरीबों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इनमें से प्रवासी मजदूूरों की तकलीफों की तरफ तो...

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मलियाना नरसंहार के 34 साल: हाशिमपुरा की तरह क्या यहां के पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा?

-द वायर, 22-23 मई को मेरठ जिले के मलियाना गांव में हुए नरसंहार और मेरठ दंगों के दौरान जेलों में हिरासत में हुईं हत्याओं की 34वीं बरसी है. उस दिन उत्तर प्रदेश की कुख्यात प्रांतीय सशस्त्र पुलिस बल (पीएसी) द्वारा मेरठ के हाशिमपुरा मोहल्ले से 42 मुस्लिम युवकों उठाकर हत्या कर दी गई थी, जबकि अगले दिन 23 मई को पास के मलियाना गांव में 72 से अधिक मुसलमानों को मार...

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जच्चा-बच्चा सर्वे: गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं का एक बड़ा हिस्सा अभी भी मातृत्व लाभ से वंचित है

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 मातृत्व लाभ के लिए गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा 6,000 रुपए/ - प्रति बच्चा की गारंटी देता है. इस अधिनियन में वह शामिल नहीं हैं, जो केंद्र सरकार या राज्य सरकारों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ या अन्य कानूनों के तहत नियमित रोजगार में रहते हुए इस तरह के लाभ उठा रहे हैं. एनएफएसए-2013 भी कानूनी...

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