Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 150
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 151
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
चर्चा में.... | ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018: किसी फैसले पर पहुंचने से पहले इस न्यूज एलर्ट को जरुर पढ़ें
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018: किसी फैसले पर पहुंचने से पहले इस न्यूज एलर्ट को जरुर पढ़ें

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018: किसी फैसले पर पहुंचने से पहले इस न्यूज एलर्ट को जरुर पढ़ें

Share this article Share this article
published Published on Nov 1, 2018   modified Modified on Nov 1, 2018

इतिहास अपने को दोहराता है- पहली बार त्रासदी और दूसरी दफे प्रहसन के रुप में. ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर मुख्यधारा की मीडिया में ऐसा ही वाकया पेश आया है.

 

पिछले साल ग्लोबल हंगर इंडेक्स(जीएचआई) पर 119 देशों के बीच भारत 100 वें स्थान पर था. मुख्यधारा की मीडिया ने सुर्खी लगायी कि 2014 के मुकाबले भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर 45 स्थान नीचे खिसका है. मीडिया में यह भ्रम इतना फैला कि नीति आयोग को स्पष्टीकरण देना पड़ा. नीति आयोग ने कहा कि 2017 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक पर भारत के स्थान की तुलना 2014 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में हासिल स्थान से नहीं की जा सकती.

 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर भारत के स्थान को लेकर मुख्यधारा की मीडिया में भ्रम इस बार भी बरकरार रहा. हिन्दी के ज्यादातर अखबारों ने लिखा कि भारत में भुखमरी के मामले में सरकार पूरी तरह फेल हो गई है, देश 4 साल में 55 से 103वें पायदान पर पहुंच गया है. इस बार भी मुख्यधारा की मीडिया से 2017 की ही तरह चूक हुई. हां, अन्तर ये रहा कि इस बार ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट के लेखकों ने पहले ही आगाह कर दिया था कि जीएचआई इंडेक्स पर किसी देश के स्थान की तुलना वर्षवार नहीं की जा सकती.

 

तुलना ना करने की वजह 

 

रिपोर्ट के लेखकों ने इसके लिए कई कारण बताये हैं. रिपोर्ट के लेखकों के मुताबिक एक तो हर साल रिपोर्ट की तैयारी करते समय में डेटा का पुनरावलोकन किया जाता है और किसी देश से संबंधित उपलब्ध नवीनतम डेटा का उपयोग होता है. डेटा में संशोधन का असर रिपोर्ट में शामिल देशों के अंकमान पर पड़ता है. दूसरे, समय-समय पर रिपोर्ट में आकलन की पद्धति में बदलाव होता है और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि हर साल जीएचआई रिपोर्ट में देशों की संख्या एक समान नहीं रहती. भुखमरी की हालत के आकलन के लिए रिपोर्ट में हर साल कुछ नए देशों को शामिल किया जाता है और किन देशों को शामिल किया जाएगा यह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि उन देशों से संबंधित जरुरी, नवीनतम और पर्याप्त डेटा मौजूद है या नहीं.

 

गौरतलब है कि साल 2014 की जीएचआई रिपोर्ट में भुखमरी की हालत के लिहाज से दर्जा तय करने के लिए कुल 76 देशों का आकलन किया गया था और 2014 के जीएचआई रिपोर्ट में भारत 55वें स्थान पर था. साल 2017 के जीएचआई रिपोर्ट में देशों की संख्या बढ़कर 119 हो गई और भारत खिसककर 100वें स्थान पर जा पहुंचा. भारत के दर्जे में 45 अंकों की यह गिरावट भुखमरी की स्थिति में किसी भारी तब्दीली के कारण नहीं हुई. इस हैरतअंगेज गिरावट की वजह रही रिपोर्ट में नए देशों को शामिल करना और भारत में मौजूद भुखमरी की स्थिति (जीएचआई अंकमान) की तुलना में इन नए देशों की स्थिति (जीएचआई अंकमान) से करना.

 

दूसरा उदाहरण 2016 का है. इस साल जीएचआई रिपोर्ट में देशों का दर्जा तय करने का तरीका बुनियादी तौर पर बदला. साल 2016 से पहले चलन था कि जिन देशों का जीएचआई अंकमान 5 या उससे ज्यादा हो, उन्हें ही इंडेक्स में दर्जावार सजाया जाएगा लेकिन 2016 में आकलन में शामिल सभी देशों को दर्जावार सजाया गया (चाहे उनका जीएचआई अंकमान 5 से कम हो या ज्यादा) और इस कारण भी रिपोर्ट में देशों की रैंकिंग खासी बदली.

 

जीएचआई रिपोर्ट में देशों के दर्जे को निर्धारित करने के लिहाज से सबसे निर्णायक साबित होने वाला बदलाव 2015 में हुआ था. इस साल आकलन की पद्धति (मेथ्डोलॉजी) में बदलाव हुआ. देशों का जीएचआई अंकमान तय करने के लिए बाल-कुपोषण की गंभीरता दिखाती दो स्थितियों चाइल्ड स्टंटिंग (5 साल से कम उम्र के बच्चों का अनुपात जिनकी लंबाई उनके उम्र के हिसाब से बहुत कम है) और चाइल्ड वेस्टिंग (5 साल से कम उम्र के बच्चों का अनुपात जिनका वजन उनकी लंबाई को देखते हुए बहुत कम है) को भी शामिल किया गया.

 

पद्धति में हुआ यह परिवर्तन 2018 के जीएचआई रिपोर्ट के लेखकों के मुताबिक देशों के जीएचआई अंकमान में बहुत ज्यादा बदलाव लाने वाला साबित हुआ. 2015 से रिपोर्ट में शामिल तकरीबन हर देश का जीएचआई अंकमान 2014 या उससे पहले के वर्षों के अंकमान से ज्यादा आता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन देशों में भुखमरी की स्थिति पहले की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ गई है.

 

तो क्या तुलना एकदम नहीं की जा सकती ?

 

इन बातों का कत्तई यह अर्थ नहीं कि 2018 के जीएचआई रिपोर्ट में किसी देश को हासिल दर्जे की तुलना पीछे के किसी साल में वहां मौजूद भुखमरी की स्थिति से कर ही नहीं सकते. इस साल की रिपोर्ट में तुलना के लिए कुछ संदर्भ-अवधि (रेफरेंस पीरियड) दी गई है. आप इस साल के जीएचआई रिपोर्ट में भारत को हासिल अंकमान की तुलना साल 2000, साल 2005 और साल 2010 में हासिल अंकमान से कर के देख सकते हैं कि बीते सालों में भारत की स्थिति भुखमरी के मोर्चे पर सुधरी है या बिगड़ी है.

 

तुलना करने पर आप पाएंगे कि 2000 और 2005, इन दोनों ही वर्षों में भारत का जीएचआई अंकमान 38.8 था जबकि 2010 में यह कम होकर 32.2 पर पहुंचा और 2018 में 31.1 पर. जीएचआई इंडेक्स के लिए किसी देश का अंकमान निर्धारित करना हो तो उस देश की 4 स्थितियों- कुपोषण (यानी देश की आबादी में ऐसे लोगों का अनुपात जिन्हें एक मानक मात्रा से कम कैलोरी का भोजन मिलता है), चाइल्ड स्टंटिंग, चाइल्ड वेस्टिंग और 5 साल से कम उम्र के बच्चों के मृत्यु-दर की गणना की जाती है. जिस देश का अंकमान जितना ही कम होता जाएगा उसकी स्थिति ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) पर उतनी ही सुधरी हुई मानी जाती है. जाहिर है, वक्त बीतने के साथ घटता जीएचआई अंकमान भुखमरी के मार्चे पर भारत की स्थिति के सुधार के संकेत करता है, बिगाड़ के नहीं.

 

इस साल की जीएचआई रिपोर्ट में भारत (जीएचआई अंकमान 31.1) भुखमरी के हालात में सुधार के लिहाज से बेशक नेपाल (जीएचआई अंकमान 21.2) और बांग्लादेश (जीएचआई अंकमान 26.1) से पीछे हैं लेकिन पाकिस्तान(जीएचआई अंकमान 32.6) और अफगानिस्तान (जीएचआई अंकमान 34.3) से भारत की स्थिति बेहतर है.

 

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018: भारत से जुड़े कुछ तथ्य

 

कुपोषण

 

भारत में साल 1999-2001 में कुपोषण(अंडरन्यूरिशमेंट) के शिकार लोगों की तादाद आबादी में 18.2 प्रतिशत थी. साल 2004-06 में यह संख्या बढ़कर 22.2 प्रतिशत पर पहुंची लेकिन 2009-2011 में देश की आबादी में कुपोषित लोगों की तादाद घटकर 17.5 प्रतिशत और 2015-16 में 14.8 प्रतिशत रह गई है.

 

वेस्टिंग

 

वेस्टिंग के शिकार बच्चों(पांच साल या इससे कम उम्र के) की तादाद भारत में साल 1998-2002 के दौरान 17.1 प्रतिशत थी, 2003-2007 यह तादाद बढ़कर 20.0 प्रतिशत पर पहुंच गई. 2008-2012 में वेस्टिंग के शिकार बच्चों की संख्या 16.7 प्रतिशत थी जबकि 2013-2017 में 21.0 प्रतिशत.

 

स्टंटिंग

 

पांच साल और इससे कम उम्र के स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या भारत में साल 1998-2002 के दौरान 54.2 प्रतिशत थी. साल 2003-2007 में यह तादाद घटकर 47.9 प्रतिशत हो गई. साल 2008-2012 में स्टंटिंग के शिकार बच्चों की संख्या 42.2 प्रतिशत थी जबकि 2013-2017 में 38.4 प्रतिशत.

 

बाल-मृत्यु

भारत में साल 2000 में पांच साल और इससे कम उम्र के बच्चों में बाल-मृत्यु की दर 9.2 प्रतिशत थी, साल 2005 में यह घटकर 7.4 पर पहुंची. साल 2010 में आंकड़ा 5.9 प्रतिशत पर पहुंचा जबकि 2016 में 4.3 फीसदी पर.

 

• साल 2018 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर भारत का स्थान 119 देशों के बीच 103 वां हैं.

 

• पड़ोसी देश चीन (जीएचआई मान: 7.6; स्थान: 25), नेपाल (जीएचआई: 21.2; स्थान: 72), म्यांमार (जीएचआई मान: 20.1; स्थान: 68), श्रीलंका (जीएचआईमान: 17.9; स्थान: 67) तथा बांग्लादेश (जीएचआई मान: 26.1; स्थान: 86) भारत (जीएचआई मान: 31.1; स्थान: 103) से बेहतर स्थिति में हैं.

 

• भारत का जीएचआई अंकमान सन् 2000 (1998-2002 की अवधि के आंकड़ों के आधार पर) तथा 2005 (2003-07 की अवधि के आंकड़ों के आधार पर) 38.8 था. साल 2010(2008-2012 के आंकड़ों के आधार पर) में भारत का जीएचआई अंकमान 32.2 हुआ जबकि 2018(2013-2017 के आंकड़ों के आधार पर) में भारत का अंकमान 31.1 हो गया है.(अंकमान जितना घटेगा भारत की स्थिति उतनी ही बेहतर मानी जायेगी)

 

•भारत 31.1 के अंकमान के साथ उन देशों में शामिल है जहां भुखमरी की स्थिति संगीन है.



Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close