अनेक विद्वानों का मानना है कि महात्मा गांधी को समझना आसान भी है और मुश्किल भी. दरअसल, गांधी की बातें सरल और सहज लगती हैं, लेकिन उनका अनुसरण करना बेहद कठिन होता है. हम सभी जानते हैं कि महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख नेता थे. वह एक सफल लेखक भी थे. आप उनकी सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 2 अक्तूबर, 1869 में...
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गोरखपुर त्रासदी: अगर उसका नाम कफील है तो वो हीरो कैसे?-- संदीपन शर्मा
कफील अहमद खान ने गोरखपुर के बाबा राघवदास अस्पताल में बच्चों की जिंदगी बचाने की कोशिश की और मीडिया की नजरों के चहेते बन गए. लेकिन अब उनके ऊपर लगातार निशाना साधा जा रहा है. इससे एक बार फिर जाहिर हुआ है कि भारत का जन-मानस धर्मान्धता की आंच में सुलग रहा है. कफील खान को निशाने पर लेना इस बात का संकेत है कि मनगढ़ंत शिकायतों और सांप्रदायिक विद्वेष की...
More »जनसंख्या नियंत्रण की चुनौती-- बालमुकुंद ओझा
आज विश्व की जनसंख्या सात अरब से ज्यादा है। अकेले भारत की जनसंख्या सवा अरब से अधिक है। भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। आजादी के समय भारत की जनसंख्या तैंतीस करोड़ थी, जो आज चार गुना तक बढ़ गई है। परिवार नियोजन के कमजोर तरीकों, अशिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के अभाव, अंधविश्वास और विकासात्मक असंतुलन के चलते आबादी तेजी से बढ़ी है। संभावना है...
More »कठमुल्ली सोच को तलाक दो!
मानो देश में बहस व विवादों की कमी थी कि ‘तीन तलाक' की अमानवीय प्रथा को लेकर लोग मैदान में उतर अाये हैं! अॉल इंडिया मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड तथा अन्य मुसलिम संगठन व मुल्ला-मौलवी हर तरफ चीख-चिल्ला रहे हैं कि ‘तीन तलाक' शरिया कानून का हिस्सा है अौर हम इससे किसी को खेलने की इजाजत नहीं दे सकते! सब ऐसे बात कर रहे हैं, मानो देश में न कोई...
More »रूढ़ियों को तोड़ रहीं डिजिटल महिलाएं-- ओसामा मंजर
पिछले दिनों मेरी मुलाकात लिपिका से हुई। वह असम के सोनापुर की हैं। स्कूली शिक्षा के लिए उन्हें जद्दोजहद तो करनी ही पड़ी, कॉलेज में दाखिला लेने के लिए भी माता-पिता को खूब मनाना पड़ा। कुछ वर्षों पहले उनकी नजर सामुदायिक सूचना संसाधन केंद्र (सीआईआरसी) पर पड़ी। यह सीखने की उनकी ललक है कि आज वह उस केंद्र की कंप्यूटर प्रशिक्षक हैं। वह कहती हैं, मेरी मां ने बताया था...
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